"Kuch Jazbaat" can say everything in its own beautiful way and connected somewhere us to our heart with our deep emotions. It's express our Feeling, Love, Affection, Care, Sorrow and Pain.
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Monday, November 30, 2015

ना जाने कैसे अब मयकश का गुज़ारा होगा

जिसे हर रंज-ओ-गम दुनिया का गवारा होगा,
हाँ वही शख्स तेरे प्यार का मारा होगा,

यही पहचान होगी बस तेरे दीवाने की,
पागल सा मिज़ाज़ उसका आवारा होगा,
तेरे रुखसार पे ही टिक के रह गयी है नज़र,
क्या इससे बेहतरीं जन्नत का नज़ारा होगा,

जानना चाहता हूँ उसकी अपनी ज़िंदगी भी,
क्या उसके घर में कभी ज़िक्र हमारा होगा,

काग़ज़ मिला, पत्ता मिला, पत्थर कोई दीवार,
अपने जज्वात को हर शय पे उतारा होगा,

पढ़ो जो तुम तो हमें याद करो,
ग़ज़ल में लिखा कहीं नाम हमारा होगा,

कसम तो खा गये हैं आज से ना पीने की,
ना जाने कैसे अब मयकश का गुज़ारा होगा,

अभी कुछ और दर बैठे रहो यूँ ही ,
अभी कुछ दर में बस उनका इशारा होगा..!!

लिल्लाह तेरा हुस्न ये तेरी अदयें

सितारे आसमाँ पर कम ना होंगे,
देखने वालों में पर हम ना होंगे,

लिल्लाह तेरा हुस्न ये तेरी अदयें,
चाहने वालों में पर हम ना होंगे,

तुम्हारी शान में फिर कौन कहेगा,
हुजूर सोचिए गर हम ना होंगे,

कल भी भटकेंगे आप जैसे लोग,
मगर इन रास्तों पर हम ना होंगे,

फूल होंगे बाहर भी होगी,
खुश्बुओं में वो तर मौसम ना होंगे..!!

Monday, October 19, 2015

एक चाँद आसमाँ पे है एक चाँद ज़मीं पर

बड़ी कशमकश है आख़िर देखे किसे नज़र...
एक चाँद आसमाँ पे है एक चाँद ज़मीं पर,

दिल है के बस बेचैन हुआ जाता है...
ना जानू ख़ुदाया है कैसा ये असर,

वो अर्श से आया हुआ लगता है हमे तो...
मिलते हैं कहाँ आज ऐसे लोग ज़मीं पर,

काश! गुंजाइश ज़रा सी और होती चादर में...
या के फिर मै होता चादर के बराबर,

बेवजह हम एक अज़ाब झेलते रहे...
समझा था गम-ए-आशिक़ी को अपना मुक़द्दर,

है आफकारा इस क़दर बीमार-ए-मोहब्बत...
ना दिन का पता है उसे ना रात की खबर..!!

Sunday, June 14, 2015

मैं जिंदगी फ़ना कर दूँगा अपनी सिर्फ तुझे थामने के लिए





इतनी सिद्दत से न चाह मेरे मेहबूब,
बंद मुट्ठी से गिरती रेत की तरह.… 
मैं चला जाऊँगी ज़िन्दगी से तेरी ज़र्रा-ज़र्रा कर के.…!!

जब जाना चाहेगी तू मेरी ज़िन्दगी से ज़र्रा-ज़र्रा, रेत की तरह....
मैं जिंदगी फ़ना कर दूँगा अपनी सिर्फ तुझे थामने के लिए..!!

Wednesday, June 10, 2015

उठा पलकों को जिस ने दिन उगाया था फ़लक पर






उठा पलकों को जिस ने दिन उगाया था फ़लक पर,
उसी की ज़ुल्फ़ का रातों पे साया हो गया है !
नज़र का एक पुरज़ा छत पे फेंका है किसी ने,
जिसे पढ़ने में पूरा चाँद ज़ाया हो गया है !!

Thursday, May 28, 2015

वो हो गयी किसी और की तेरे साथ छोड़ कर,

मेरे यार तू क्यों नही समझ रहा,
उस बेवफ़ा का भूत तुझ से क्यों नही उतर रहा ।।

वो हो गयी किसी और की तेरे साथ छोड़ कर,
एक तू है जो अब तक इश्क़ के जाल में उलझा रहा ।।
वो खुश है अपनी दुनिया में तेरी कद्र छोड़ कर,
तू अब भी उसके याद में रात भर रोता रहा ।।

क्या मिल जायेगा तुझे यु खुद को जला कर,
क्यों यू तू खुद को पैमानों में डुबोता रहा ।।

तू अब भी उसके एक झलक का तलबगार है,
वो मसरूफ़ हो अपनी ज़िन्दगी से तुझे धोता रहा ।।

सुन मेरी बात बदल दे ये दिल और उसकी धड़कन,
जो हर घडी तुझे उसकी यादो से जोड़ता रहा ।।

वाक़िब हु अशां नही इतना उसको भुला देना,
पर क्या करेगा इस दिल का जो टूट-टूट कर बिखरता रहा ।।

उठ निकल इस इश्क़ के दल-दल से............
ये इश्क़ इस दुनिया में किसी काम का ना रहा ।।

याद करेगा इस यार को जब ख़ुद की नज़रो में गिर जायेगा
एक में ही था जो हर लम्हां तुजे समझाता रहा ।।

~Abhishek~

Saturday, February 28, 2015

सिर्फ नज़र से जलते हो आग चाहत की

सिर्फ नज़र से जलते हो आग चाहत की,
जलाकर क्यों बुझाते हो आग चाहत की,

सर्द रातों में भी तपन का एहसास रहे,
हवा देकर भड़काते हो आग चाहत की,

आपकी नज़रों में मेरे प्यार का ठिकाना,
हम से क्यों छिपाते हो आग चाहत की,

नाज़ुक जिस्म पर उंगलिया जो रख दूँ,
बड़ी खुशी से छिपाते हो आग चाहत की,

फूलों से लिपट कर बिखर जाओ मुझ पर,
अरमानों से लुटाते हो आग चाहत की...!!

Saturday, February 21, 2015

निगाह-ए-यार ने क्या कह दिया ख़ुदा जानें,

निगाह-ए-यार ने क्या कह दिया ख़ुदा जानें,
तड़प के तोड़ दिया दम मेरी तमन्ना ने.…
ग़म-ए-फ़िराक़ ख़ुद एक शोला था ही था लेकिन,
ये और आ गए बदल भी आग बरसाने.…

मेरी निगाह में तौहीन है मोहब्बत की,
ये बात-बात पर आँखों में अश्क़ भर लाने.…
करम तो फ़र्ज़ यग़ानों को था बजा लेकिन,
कभी-कभी तो बड़े काम आये बेगाने.…

इस एअतिराफ़-ए-मोहब्बत पे क्यों ना लूट जाऊं,
तेरी निग़ाह जो मुझ से लगी है शर्माने......
मिज़ाज-ए-देहर बदलना मुहाल है लेकिन,
अभी बदल दें, अगर चाह तेरे दिवाने......

ग़म-ए-ज़माने में यूँ जल ख़ुलूस-ए-निय्यत से,
पराई आग में जलते हैं जैसे परवाने......
ये एहतिराम-ए-शब-ए-ग़म नहीं तो फ़िर क्या है ?
शुरू-ए-शाम से छलका रहा हूँ पैमाने…… 

बहार के मुतमन्नि तो है सभी.… 
जो गुलिस्तां पे गुज़री है कोई क्या जाने…???

Friday, February 13, 2015

जो शिकायत आँसुओ की उनसे कर दोगे






मंज़िलों से लौट अाने को नही कहता,
और तुमसे सर झुकाने को नही कहता,
एक ही उपवान इनको मत समझना,
हजारो अर्थ लेकर आंसुओ की बूंद है गिरती ।।


ये मेरे आंशु नही, यादें उन्हीं की है,
दूरियों की धूप में आज पिघली है,
रोकते क्यों हो लबो तक तो पहुँचने दो,
चुम लूँ इनको अतः आँखों से निकली है ।।


जो शिकायत आँसुओ की उनसे कर दोगे,
बह निकलने से मुझे मज़बूर कर दोगे,
खार यादें भी नहीं मैं चूम पाऊँगा,
छिन गया जो यह सहारा जी न पाउँगा।।


इसलिए इस बार उनको लौट आने दों ,
लछ्य पर बढ़ कर स्वयं को तौल आने दों,
आ गए जो आरती उनकी उतारूँगा,
आँसुओं के अर्थ सारे फिर बता दूंगा ।।

(KJ00001)

Saturday, January 31, 2015

बारूद मेरे अन्दर का भीग गया तेरे आंसुओं से वरना



बारूद मेरे अन्दर का भीग गया तेरे आंसुओं से वरना...
ये दिल एक बड़ी घटना को अंजाम दे देता…!!

~♥♥~
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कभी जिंदगी में किसी के लिये मत रोना,
क्योंकि वो तुम्हारे आँसुओं के क़ाबिल ना होगा..
और जो इन आँसुओं के क़ाबिल होगा,
वह तुम्हें रोने ही नहीं देगा...!!

~♥♥~

Saturday, January 24, 2015

Aankho ne na jane kab kab reh kar ansu piye







Aankho ne na jane kab kab reh kar ansu piye
Hum to usi k liye marenge jiske liye jiye
Unke Dil me hamare liye abhi koi jagah ni hai
Par wo bhi ek din royenge hamare liye..!!

~♥♥~

Apni kismat pe naaz tha hame




Apni kismat pe naaz tha hame,
Apni chahat pe aitbaar tha hame,

Bewafayi na ki usne hamse,
Ye to bass kismat ki ek ladai thi hamse,

Wo na to aaj bhi itni door hai, na kabi hogi,
Iss bewafa kismat me kahi to uski mulakat likhi hogi..!!

~♥♥~

उनके दिल में क्या लिखा है हम पढ कर बता सकते हैं






उनके दिल में क्या लिखा है हम पढ कर बता सकते हैं,
भीगी पलकों में क्या बसा है हम अब भी बता सकते हैं,
ठीक है कि हमने बेवफ़ाइयों के दौर देखे हैं मगर.......
किस दिल में कितना दम है हम अब भी बता सकते हैं..!!

~♥♥~

प्यार में मेहरबानी की ज़रूरत नहीं होती





प्यार में मेहरबानी की ज़रूरत नहीं होती,
यूं ही झूठी कहानी की ज़रूरत नहीं होती,
प्यार तो दिलों को जीतने का खेल है यारो,
इस खेल में बे-ईमानी की ज़रूरत नहीं होती..!!

Wednesday, November 12, 2014

Muje Kisi Se Muhabbat Nahi Siwa Tere








Muje Kisi Se Muhabbat Nahi Siwa Tere
Muje Kisi Ki Jarurat Nahi Siwa Tere…

Meri Najar Ko Thi Talash Jiski Barso Se
Kisi Ke Paas Wo Surat Nahi Siwa Tere...

Jo Mere Dil, Meri Zindagi Se Khel Sake
Kisi Ko Itni Ijaazat Nahi Siwa Tere……..!!

~♥♥~

Friday, October 31, 2014

Apni ankho ke ashq baha kar sona






Apni ankho ke ashq baha kar sona,
Tum meri yaado ka diya jalakar sona,

Darr lagta hai neend hi chhin na le tujhe,
Tu roz mere khwabo mein aa kar sona...!!

 ~♥♥~

Tere saanche me dhal raha hu me








Tere saanche me dhal raha hu me,
sakht raanho pe chal raha hu me,

Wo koun he jo nazar nahi aata,
Jinke saaye me chal raha hu mei...!!

 ~♥♥~

Darya wafaon ka kabhi rukta nahi






Darya wafaon ka kabhi rukta nahi,
  Mohabat mein insan kabhi jhukta nahi,

Khamosh hein hum unki khushi ke liye,
  Aur wo smajh bethay hein k dil humara dukhta nahi...!!

 ~♥♥~

Kharid Loonga Tum Se






Kharid Loonga Tum Se,
  Tumhari Saari Udaasiyan,

Sikke Mere Mizaaj Ke,
  Jis Roz Chalenge...!!

 ~♥♥~

Shiddat se chaha hai jisko









Shiddat se chaha hai jisko,
    Uski mohabbat ki tamanna ki hai,

Ae khuda har lamhe pe koi aameen kahe,
    kyo ki har saans me unhe paane ki dua ki hai...!!

 ~♥♥~