"Kuch Jazbaat" can say everything in its own beautiful way and connected somewhere us to our heart with our deep emotions. It's express our Feeling, Love, Affection, Care, Sorrow and Pain.
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Saturday, March 11, 2017

कैसे उनके बगैर वक़्त बिताया जाए 💕

कैसे उनके बगैर वक़्त बिताया जाए,
दिल-ए-नाशाद को किस तरह मनाया जाए,

जब दिल को ना मिले कहीं सुकून तो,
उसकी तस्वीर को सीने से लगाया जाए,

खुद बिखर जाएगी सव भर में रौशनी,
बस रुख़-ए-यार से ये परदा हटाया जाए,

जो तरसते रहे वफ़ा के  लिए ,
उनको आईना दिखाया जाए ,

चलो आसान कर देते हैं खुदा की राहें,
जो परेशान हैं उन्हें और सताया जाए..!!

Monday, November 30, 2015

तुझे ना देखूं तो ये दिल बेहाल रहता है

जाने क्या छूटा है जिसका मलाल रहता है,
आज कल दिल बड़ा परेशां हाल रहता है,

क्यूँ मै देता हूँ तुझपे इतनी तबज्जोह आख़िर?
हर घड़ी बस तेरा फ़िक्र-ओ-ख़याल रहता है,

तेरी आगोश में ही मिलता है सुकून मुझे,
तुझे ना देखूं तो ये दिल बेहाल रहता है,

लोग दीवाने हैं, आशिक़ हैं और मुंतज़ीर हैं,
जब तलक हुस्न पे रंग-ओ-जमाल रहता है,

ये मायूशी ये तन्हापन हर घड़ी बेकरारी,
या यूँ कहिए के अब जीना मुहाल रहता है..!!

कब से तेरी फिराक मै बैठे हैं

हद-ए-निगाह तक वाकी जहाँ तन्हाई है,
ज़िंदगी जाने हमें किस जगह पे लाई है,

 खामोश होकर बैठ गया हूँ मै हारकर,
खुद अपनी ही कुव्वत ना अपने कम आई है,

उठकर दरीचे से गली में झाँक लेते हैं,
जब-जब तेरी सी पायल की आवाज़ आई है,

हुआ है मुझको उनकी नरम उंगलियों का गुमाँ,
ये हवा शायद उनके हाथों को छूके आई है,

अभी घबराता है वो मेरे पास आने से,
अभी उस शख्स से कुछ ताज़ा सनासाई है,

हमारे रवैये से है हर दोस्त परेशां,
क्या करें हमने कुछ फ़ितरत ही ऐसी पाई है,

हम जिसके भी रहबर हुए उसी के हो गये,
समझा ना कौन दोस्त है या कौन भाई है,

कब से तेरी फिराक मै बैठे हैं ,
तू आया है ना तेरी कोई खबर आई है..!!

गम-ए-फिराक ही ता-उम्र उठाएँगे क्या



हमें तसल्ली कभी सफ़र से हासिल ना हुई,
मुतमईन  कर दे ऐसी कोई भी मंज़िल ना हुई,

एक अरसे से कुछ कमी सी है,
ज़िंदगी जैसे मुकम्मल ना हुई,

गम-ए-फिराक ही ता-उम्र उठाएँगे क्या,
बरसों बीते मगर वस्ल ना हुई,

नज़र बेचैन, दिल बेचैन, ये ज़हन बेचैन,
ये तबीयत आज से ज़्यादा कभी बेकल ना हुई..!!

Monday, October 19, 2015

सिलसिला साँसों का चलता तो रहा

बबाल-ए-जाँ है आदमी के लिए,
इश्क़ आसाँ नही किसी के लिए,

कभी अपने कभी किसी के लिए,
कितना तरसे हैं हम खुशी के लिए,

यही दस्तूर है जमाने का,
कोई रुकता नही किसी के लिए,

सिलसिला साँसों का चलता तो रहा,
फिर भी तरसे है ज़िंदगी के लिए,

मेरे अश्कों में है खुशी उसकी,
यूँ भी रोते हैं हम किसी के लिए,

हौसला भी तो कर नही सकता,
क्या कहूँ अपनी बेवशी के लिए,

ये फक़त तेरी ही तनक़ीद नही,
मेरे अश्-आर है सभी के लिए,

मोहब्बत उसके बस की बात नही,
ना वो अच्छा है दोस्ती के लिए,

जिसने छोड़ा है तन्हा,
राह तकते हैं फिर उसीके लिए.!!

Friday, August 14, 2015

उनकी राह में पलकें बिछाके बैठे हैं

उनकी राह में पलकें बिछाके बैठे हैं,
हम अपने दर पे निगाहें लगाके बैठे हैं,

सर-ए-आम भी बैठे हैं दीवाने हुजूर के,
कुछ ऐसे भी हैं जो चिलमन से लगे बैठे हैं,

हसरत तो है दीदार की हिम्मत मगर नही,
कई मुंतज़िर हैं ऐसे जो नज़रें झुकाके बैठे हैं,

क्या खूब मुश्किल है ये इज़हार-ए-वफ़ा भी,
एक तूफ़ां को हम दिल में दबाके बैठे हैं,

हमने हर शय से फेर ली है नज़र जिनके लिए,
हाँ वही हमसे निगाहें चुराके बैठे हैं,

हम उनके इशारों पे थिरकते हैं ,
वो हैं के इत्मिनान से तकिया लगाके बैठे हैं..!!

Sunday, June 14, 2015

मेरे मरने के बाद मेरी कहानी लिखना

मेरे मरने के बाद मेरी कहानी लिखना ।
कैसे बर्बाद हुई मेरी ये जवानी लिखना ।।

लिखना मेरे हर जख्म मेरे दर्द का हिसाब ।
उन बेसुमार बेखुमारी के जज़्बात  लिखना ।।

और लिखना मेरे तरसते होठों की खुशी ।
कैसे बरसे मेरी आँखों से पानी लिखना ।।

और लिखना के उसे इंतज़ार तो बहुत था तेरा ।
आख़री साँसों मे वो हिचकियों की रवानी लिखना ।।

लिखना के मरते वक़्त भी देता था दुआ तुझको ।
खुली रही ये आँखे इंतेज़ार में तेरे लिखना ।।

तूने कहा था कभी न छोडुंगी हाथ तेरा ।
हाथ बाहर थे क़फ़न से ये निशानी लिखना ।।

~Abhi~

Friday, February 13, 2015

जो शिकायत आँसुओ की उनसे कर दोगे






मंज़िलों से लौट अाने को नही कहता,
और तुमसे सर झुकाने को नही कहता,
एक ही उपवान इनको मत समझना,
हजारो अर्थ लेकर आंसुओ की बूंद है गिरती ।।


ये मेरे आंशु नही, यादें उन्हीं की है,
दूरियों की धूप में आज पिघली है,
रोकते क्यों हो लबो तक तो पहुँचने दो,
चुम लूँ इनको अतः आँखों से निकली है ।।


जो शिकायत आँसुओ की उनसे कर दोगे,
बह निकलने से मुझे मज़बूर कर दोगे,
खार यादें भी नहीं मैं चूम पाऊँगा,
छिन गया जो यह सहारा जी न पाउँगा।।


इसलिए इस बार उनको लौट आने दों ,
लछ्य पर बढ़ कर स्वयं को तौल आने दों,
आ गए जो आरती उनकी उतारूँगा,
आँसुओं के अर्थ सारे फिर बता दूंगा ।।

(KJ00001)

Monday, February 9, 2015

लगता है तन्हाई में आहें, भरे जा रहे हैं





लगता है तन्हाई में आहें, भरे जा रहे हैं,
याद कर के रात हिज्र की, सहे जा रहे हैं,

दिल की तबाही का, हुआ हादसा शहर में,
अब गाँव की मिटटी से भी, डरे जा रहे हैं,…

~♥♥~

Saturday, January 31, 2015

ढूंढ रहा हूँ मगर नकाम हूँ अब तक



ढूंढ रहा हूँ मगर नकाम हूँ अब तक......!
वो लम्हा, जिस्मे तुम याद न आये हो.!!
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बस इतनी सी बात पर हमारा परिचय तमाम होता है !
हम उस रास्ते नही जाते जो रास्ता आम होता है…!!!!
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जिंदा रहे तो हर दिन तुम्हे याद करेंगे,
भूल गये तो ये
समझ लेना, खुदा ने हमें याद कर लिया..!!

~♥♥~

इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है





इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है,
खामोशियो की आदत हो गयी है,
न शिकवा रहा न शिकायत किसी से,
अगर है तो एक मोहब्बत,
जो इन तन्हाइयों से हो गई है..!

~♥♥~

पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है





पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है,
हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है,

ये तो बस वही जान सकता है मेरी तनहाई का आलम,
जिसने जिन्दगी में किसी को पाने से पहले खोया है..!!


~♥♥~

Saturday, January 24, 2015

Nigah meri tarasti hai mujhe tum yaad aate ho





Nigah meri tarasti hai mujhe tum yaad aate ho,
Mohabat kb tarapti hai mujhe tum yaad aate ho,
Sama jata hai aankhon main tere jazboon ka bheegapan,
Kahin barish barasti hai Mujhe tum yaad aate ho,
Zamane ke swalon ko main haas kr taal du lekin,
Nami aankhon ki kehti hai Mujhe tum yaad aate ho..!!

~♥♥~

Aankho ko yun hi nam kar liya





Aankho ko yun hi nam kar liya,
Hum roye kahan the...
Marne ka ek bahana tha,
To hum jiye hi kahan the...
Humne apni taqdeer khud likhi hai,
Kisi ko puchne ka haq nahi,
k tum khoye kahan the..!!

~♥♥~

जहाँ कभी तस्वीर बसा करती थी उनकी



जहाँ कभी तस्वीर बसा करती थी उनकी,
आज वो दिल खाली और सुनसान पड़ा है...
ग़म के सायों ने घर कर लिया है अपना,
अब तो हर कोने में दर्द का सामान पड़ा है...
कभी ये धड़कता था उनका नाम लेने भर से ,
पर आज उनकी कशिश से अनजान पड़ा है...
जो दिल कभी रोशन था तस्वीर से उनकी,
आज वो अंधेरे में गुमसुम सा बेजान पड़ा है..!!

~♥♥~

Friday, October 31, 2014

Waqt ne humein chup rehna sikha diya






Waqt ne humein chup rehna sikha diya,
Aur halat ne sub kuch sehna sikha diya,

Ab kisi se koi aas nahi hai mujhe,
In tanhaiyon ne humein akele Jeena sikha diya...!!

 ~♥♥~

Sabke chehare me vo bat nhi hoti hai






Sabke chehare me vo bat nhi hoti hai,
Thode aandere se rat nhi hoti hai,

Jindagi me log bahut pyaar karate hai,
Kya kare unhi se aaj-kal bat nhi hoti hai...!!

~♥♥~

Bhulne Waale Hume Bhul Jaate Hai








Bhulne Waale Hume Bhul Jaate Hai,
    Dil Se Unke Hum Nikal Jaate Hai…

Jab Tak Hoti Nahi Zarurat Humari Logon Ko,
    Hum Kahan Kissi Ko Yaad Aate Hai...!!

 ~♥♥~

Meri Mohabbat bezuban hoti Rahi







Meri Mohabbat bezuban hoti Rahi,,
Dil ki dhadkan apna wajud khoti rahi….

Koi nahi Aaya mere Dukh ke karib,,
Ek Barish hi thi jo Sath Roti Rahi...!! ~♥♥~

Tuesday, October 28, 2014

Ye Yaad Hai Tumhari,




Ye Yaad Hai Tumhari,
Ya Yaadoon Mein Tum Ho.

Ye Khwaab Hai Tumhare,
Ya Khwaaboon Mein Tum Ho.

Hum Nahi Jaante,
Humein Bus Itna Batado.

Hum Jaan Hai Tumhari,
Ya Hamari Jaan Tum Ho…!

~♥♥~