"Kuch Jazbaat" can say everything in its own beautiful way and connected somewhere us to our heart with our deep emotions. It's express our Feeling, Love, Affection, Care, Sorrow and Pain.
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Monday, November 30, 2015

उसके होठों पे मरहबा देखा


सब-ए-फुरकत जो आसमाँ देखा,
चाँद तारों को बेबज़ाह देखा,

वो जब मिला तो सोचने लगा मै,
उसको देखा मगर कहाँ देखा,

बड़ा ज़िद्दी बड़ा तन्हा पसंद है,
उसके अपनो को भी खफा देखा,

जिसकी आँखों में तेरा चेहरा था,
उसके होठों पे मरहबा देखा,

दौर-ए-चाहत अजीब आलम था,
शाम देखी ना सबेरा देखा,

वो मेरे सामने रहता था मगर,
ना ज़ी भरके कभी उसे देखा,

वो शायद सोचता जा रहा था मुझे,
उसने कुछ मुड़कर इस तरह देखा,

 ज़िंदगी कम सी लगी है,
जब कहीं कोई हादसा देखा..!!

Monday, October 19, 2015

सिलसिला साँसों का चलता तो रहा

बबाल-ए-जाँ है आदमी के लिए,
इश्क़ आसाँ नही किसी के लिए,

कभी अपने कभी किसी के लिए,
कितना तरसे हैं हम खुशी के लिए,

यही दस्तूर है जमाने का,
कोई रुकता नही किसी के लिए,

सिलसिला साँसों का चलता तो रहा,
फिर भी तरसे है ज़िंदगी के लिए,

मेरे अश्कों में है खुशी उसकी,
यूँ भी रोते हैं हम किसी के लिए,

हौसला भी तो कर नही सकता,
क्या कहूँ अपनी बेवशी के लिए,

ये फक़त तेरी ही तनक़ीद नही,
मेरे अश्-आर है सभी के लिए,

मोहब्बत उसके बस की बात नही,
ना वो अच्छा है दोस्ती के लिए,

जिसने छोड़ा है तन्हा,
राह तकते हैं फिर उसीके लिए.!!

क्या इन्ही हालात में ही जीना होगा उम्र भर

क्या खबर थी इस तरह ही जीना होगा उम्र भर...
दर्द-ए-दिल सीने में लेकर जीना होगा उम्र भर,

सोचा था कुछ रोज बाद हम भी मुस्कुराएंगे...
सोचा ना था आंशुओं को पीना होगा उम्र भर,

मैने भी उफ़ ना की और वो भी सताते रहे...
सोचा था के ये तो उनसे भी ना होगा उम्र भर,

सोच बदली है कभी ना सोच बदलेगी कभी...
आदमी को अपनी तरह जीना होगा उम्र भर,

हर दिन के इख्तेताम पर ये सोचता हूँ...
क्या इन्ही हालात में ही जीना होगा उम्र भर..???

Wednesday, August 19, 2015

किसी शायर ने मौत को क्या खूब कहा है



किसी शायर ने मौत को क्या खूब कहा है

ज़िन्दगी में दो मिनट कोई मेरे पास न बैठा..
आज सब मेरे पास बैठें जा रहे थे...

कोई तोहफा न मिला आज तक मुझे और..
आज फूल ही फूल दिए जा रहे थे...

तरस गए हम किसी के एक हाथ के लिए..
और आज कंधे पे कंधे दिए जा रहे थे...

दो कदम साथ न चलने को तैयार था कोई..
और आज काफिला बन साथ चले जा रहे थे...

आज पता चला मुझे की मौत कितनी हसीन होती है..
कमबख्त …..हम तो यूहीं जिंदगी जीये जा रहे थे…!!

Thursday, June 18, 2015

घर बनाने में वक़्त लगता है

घर बनाने में वक़्त लगता है,,,
पर मिटाने में पल नहीं लगता,,

दोस्ती बड़ी मुश्किल से बनती हैं,,,
पर दुश्मनी में वक़्त नहीं लगता,,

गुज़र जाती है उम्र रिश्ते बनाने में,,,
पर बिगड़ने में वक़्त नहीं लगता,,

जो कमाता है महीनों में आदमी,,,
उसे गंवाने में वक़्त नहीं लगत,,

पल पल कर उम्र पाती है ज़िंदगी,,,
पर मिट जाने में वक़्त नहीं लगता,,

जो उड़ते हैं अहम के आसमानों में,,,
जमीं पर आने में वक़्त नहीं लगता,,

हर तरह का वक़्त आता है ज़िंदगी में,,,
वक़्त के गुज़रने में वक़्त नहीं लगता…!!

~AP~

Sunday, June 14, 2015

मुझको इस आस में जीने का सलीका नहीं आता


मुझको इस आस में जीने का सलीका नहीं आता,
कोई मेरा है तो फिर मुझ में सिमट क्यों नहीं जाता !

दिल-ए-नादां की तसल्ली को तो है अफ़साने बहुत,
फिर भी ये दिल चुप के संभल क्यों नहीं जाता...!

हजारों लोग है बसते इस जहाँ में पर,
जाने तेरे सिवा मेरे दिल का नगर बस क्यों नहीं पाता !

सुबह-ओ-शाम आँखों में बसी रहती है सूरत तेरी,
मैं तेरे दिल में बस जाऊं मुझ को ये हुनर क्यों नहीं आता !!

Friday, February 13, 2015

इस पार भी नहीं हूँ, उस पार भी नही हूँ...

इस पार भी नहीं हूँ,
उस पार भी नही हूँ,
ज़र्जर है नाव मेरी...
मंझधार में फंसा हूँ ।।

मैं धरा भी नही हूँ,
मैं व्योम भी नही हूँ,
घन से घिरी घटा के...
तम तोम में फ़सा हूँ ।।

मैं प्यार भी नहीं हूँ,
निस्तार भी नही हूँ,
वीणा के उलझे - उलझे...
से तारो मैं फंसा हूँ ।।


(KJ00002)

Saturday, January 31, 2015

दरिया ने झरने से पुछा






दरिया ने झरने से पुछा...............
तुझे समन्दर नहीं बनना है क्या ?
झरने ने बडी नम्रता से कहा.........
बडा बनकर खारा हो जाने से अच्छा है
कि मैं छोटा रह कर मीठा ही रहुं.......!!


~♥♥~

वक़्त से लड़कर जो अपना नसीब बदल दे





वक़्त से लड़कर जो अपना नसीब बदल दे,
इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे,

कल क्या होगा कभी ना सोचो,
क्या पता कल वक़्त खुद अपनी लकीर बदल दे..!!

~♥♥~

मुश्किलों में भाग जाना आसान होता है





मुश्किलों में भाग जाना आसान होता है…
हर पहलू जिंदगी का इम्तेहाँ होता हैं…
डरने वालो को कुछ मिलता नही जिंदगी में…
और लड़ने वालो के कदमो में जहाँ होता है…

~♥♥~

Saturday, January 24, 2015

मौत से क्यों डरते हैं हम, उसे तो आना ज़रूर है



मौत से क्यों डरते हैं हम, उसे तो आना ज़रूर है,
क़फन तो अखिरी चोला है, उसको बदलना ज़रूर है,
इस रुखसती को देख कर क्यों ग़मगीन हो दोस्त,
आज किसी का कल किसी का, जनाज़ा उठना ज़रूर है,

किसी को शमशान पहुंचा कर क्यों रोते हैं लोग,
जबकि हर किसी को एक दिन, वहां जाना ज़रूर है,
दुनिया के राग रंग में यूंही डूब जाते हैं लोग,
जबकि यहाँ से सब कुछ छोड़ कर, जाना ज़रूर है..!!

~♥♥~

कहने को ज़िंदा हूँ, पर अपनों से दूर हूँ मैं






कहने को ज़िंदा हूँ, पर अपनों से दूर हूँ मैं,
अपने हालात से, न जाने क्यों मजबूर हूँ मैं,
अपनों के दिये दर्द सहता रहा ज़िंदगी भर,
किसी ने नहीं सोचा, क्यों इतना बेनूर हूं मैं..!!

~♥♥~

आज कल दुनिया में भला मुस्कराता कौन है



आज कल दुनिया में भला मुस्कराता कौन है,
ज़िंदगी की इस दौड़ में हंसता हंसाता कौन है,
तारों को ताकते गुज़र जाती हो रात जिनकी,
उनको क्या पता कि ख्वाबों में आता कौन है..!

सबके दिल में होती है मुस्कराने की चाहत,
पर उनके होठों से हंसी आखिर चुराता कौन है,
इस पेट कि खातिर भागती दौड़ती है दुनिया,
अब हंसने के लिये भला वक़्त बचाता कौन है..!!

~♥♥~

उल्फ़त के मारों से, मेरी दास्तां मत कहना

उल्फ़त के मारों से, मेरी दास्तां मत कहना,
कभी तलबगारों से, मेरी दास्तां मत कहना,
कहीं निकल न जाएं उनकी आँखों से आंसू,
कभी भी अपनों से, मेरी दास्तां मत कहना,
मैं मोहब्बत और दोस्ती का कायल हूं यारो,
कभी भी दुश्मनों से, मेरी दास्तां मत कहना,
बस ये अंधेरा ही मेरा मुकद्दर है अब तो,
कभी भी रोशनी से, मेरी दास्तां मत कहना,
कहीं मेरे दर्द से न बिखर जाएँ वो भी,
इन हसीन वादियों से, मेरी दास्तां मत कहना,
हम तो निकल जायेंगे लम्बे सफ़र पर यारो,
कभी भी इन राहों से, मेरी दास्तां मत कहना..!!

~♥♥~

मोहब्बत का, ये अजब दस्तूर होता है






मोहब्बत का, ये अजब दस्तूर होता है,
जिसको दिल दो, वही हमसे दूर होता है,
दिल भले ही काँच का नहीं होता यारो,
फिर भी टूट कर, वो चकना चूर होता है..!!

कभी दिल टूट गया, तो कभी सपने बिखर गये






कभी दिल टूट गया, तो कभी सपने बिखर गये,
कभी गैरों की कशमकश में, अपने बिखर गये,
टुकड़ों में ज़िंदगी जी है मैंने अब तक,
इन टुकड़ों को बटोरने में, सारे अरमां बिखर गये..!!

~♥♥~

Friday, October 31, 2014

Aansoon Ki Keemat






Aansoon Ki Keemat Who Kya Jaane,
Jo Har Baat Pe Aansoon Bahaate Hai….

Iski Keemat Toh Unse Puncho,
Jo Ghum Me Bhi Muskuraate Hai...!!

 ~♥♥~

Aaj waqt guzar jata hai







Wo yaro ki mehfil, wo muskurate pal,
   Dil se juda hai apna bita hua Kal,

Kabhi jindagi guzjarti thi Waqt bitane me,
   Aaj waqt guzar jata hai chand kagaj ke note kamane me...!!

 ~♥♥~

Tuesday, October 28, 2014

Kashmakash yeh zindgai ki kaisi hai




Kashmakash yeh zindgai ki kaisi hai,
Meri zindagi hi mujh se tez chalti rehti hai!!

Koshishe hazaar ki rok lu waqt ko lekin,
Woh to mutthi mein band reit jaisi hai!!

Jitni koshishe kar lu usey thamne ki,
Utni hi tezi se fisalti rehti hai!!

Waqt ko kaun rok paya hai aaj tak,
Bas bandh ghadi ke kaanto ko dekh lu,
To yeh arzoo poori ho jaane jaisi dikhti hai!!……!

~♥♥~

Likha hai sath thoda thoda sbhi ka






Koi nhi hota hmesha ke liye kisi ka,
Likha hai sath thoda thoda sbhi ka,
Maat banao kisi ko apne jine ki wajah,
Kyuki jina hai
akele yehi usool hai zindgi ka…!

~♥♥~