"Kuch Jazbaat" can say everything in its own beautiful way and connected somewhere us to our heart with our deep emotions. It's express our Feeling, Love, Affection, Care, Sorrow and Pain.

Wednesday, July 29, 2015

ज़िद्दी ये दिल कोई बात मेरी मानता नही

ज़िद्दी ये दिल कोई बात मेरी मानता नही,
कम्बख़्त मेरी बेवशी को जनता नही,

ए दिल कहे तो तेरे लिए जान भी दे दूं,
एक उसके सिवा कुछ भी मगर माँगता नही,

समझा है मैने दर्द तेरा पर मै क्या करूँ,
इस दर्द की दवा तो कोई जनता नही,

ये किसकी आरजू है किसका ख़याल है,
आँखों से मेरी अलविदा जो चाहता नही,

नादान तो ये नही जो मेरी बात ना समझे,
हर बात जनता है मगर मानता नही..!!